. मराठी बनाम उत्तर भारतीय की लड़ाई का मकशद शुद्ध रूप से भारत को कमजोर करने का है. इस ओछी हरकत से तत्काल कुर्सी का लाभ मिल जाता है. इस तरह की लड़ाई अगर अन्य राज के लोग भी छेड़ दे तो मुंबई की चमक-दमक फीकी पड़ जाएगी. चाचा-भतीजा की बोलती बंद हो जाएगी. “सामना” का दुकान बंद हो जायेगा और कुर्सी में पहिया लग जायेगा.
. . मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है. विश्व पटल पर मुंबई का अपना स्थान है. वाणिज्यिक राजधानी भारत का मुंबई ही है. इसे सवारने में, इसे गढ़ने में देशवाशियों का योगदान है. झारखण्ड अगर कोयला भेजता है, तो ओड़िसा लोहा. सीमेंट बनाने के लिए लाइम स्टोन भी दुसरे राज्यों से ही महाराष्ट्र में जाता है. इस लिए हम कह सकते हैं की महाराष्ट्र भारत का है और पुरे देश के खून पसीने से सिच कर इसे सवारा गया है. यहाँ फ़िल्म-जगत को अन्य राज्य से पहुचें लड़के लड़किओं ने अपना अभिनय कला से, अपनी प्रतिभा से अंतराष्ट्रीय जगत में ख्याति दिलवाया है.
.. . बाल ठाकरें, और राज ठाकरे की दुकान क्षेत्रवाद से ही चलती है. ये स्वार्थी लोग क्षेत्रवाद के भ्रम जाल में जितने अधिक लोगों को फसायेंगे उतना ही ज्यादा इनका उल्लू सीधा होगा. लोगों का, महाराष्ट्रवासियों का विकाश हो या न हो इनका विकाश होते रहेगा. वंशवाद का बेल बढ़ता रहेगा.
.. . पूरी दुनिया जानती है की क्षेत्र वाद से विकास नहीं बिनाश होता है. किसी भी देश को कमजोर करने का सफल तरीका क्षेत्र वाद ही है. दुश्मन देश इस तकनीक पर अरबों रूपये पानी की तरह बहाते है. अपने एजेंट पाल कर रखते है. इस कार्य को कराने के लिए सारी सुबिधा मुहैया करते है. इस क्षेत्रवाद से देश या राज्य का भला कभी न होता है, न होगा.
.. स्थानीय बनाम बाहरी का नारा राजनीती प्रेरित है. इसे हम ओछी राजनीती कह सकते है. दुशरे राज्य के मजदुर बद से बदतर स्थिति में रह कर अपना जीवन-यापन करते है. एक तंग कोठारी में 15 -20 व्यक्ति रह कर तथा 15 -16 घंटे काम कर के किसी तरह कुछ रूपये बचा कर घर भेजते है. भला ऐसे लोगों से महाराष्ट्र को क्या घाटा हो सकता है? भूंजा बेचने वालों टेम्पो चलाने वालों पर अपनी बहादुरी दिखाना कायरता की चरम पराकाष्टा है. पिछले सालों एक भुजा के दुकान को लुटते हुए टीवी चैनलों पर दिखाया गया था. राज ठाकरे का आन्दोलन के दौरान ये घटनाये घटी थी. बिहार के एक लड़के की जान ले ली गयी थी, वो बेचारा रेलवे का परीक्षा देने गया था. देश का सर शर्मिंदगी से उस दिन पुरे विश्व में झुक गया था. राज ठाकरे की विजय अभियान से सारा देश हतप्रभ था. और ताज्जुब की राज को कुछ न हुआ.गृह मंत्री देखते रह गए. साशन तंत्र देखता रह गया.
.. .. भेदभाव वाली राजनीति करने वाले समूहों और व्यक्तियों को प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए, साथ ही साथ अलग से कानून बना कर एक साल के अन्दर सजा देने का प्रावधान होना चाहिए. नहीं तो अलगाव वादी ताकतों को बल मिलेगा और देश कमजोर होगा. पूरब-पश्चिम के झगडे में लाचार लोगों मजदूरों की जान जाती रहेगी
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