सरकार जब भ्रष्ट होती हैं, तब जनता बगावत करती है, फिर शुरू होता है दमन का सिलसिला। हालाकि दमन से बगावत और तेज हो जाता है। आजादी के बाद आम लोगो ने जो सपना देखा था, वो सपना चूर-चूर हो गया है,और आम लोगो को ये लगने लगा है, कि एक लड़ाई अंग्रेजों को भागने से भी बड़ी, लड़नी पड़ेगी। युवा उग्रवाद का रास्ता यूँ ही नहीं पकड़ रहे हैं, इस रास्ते को पकड़ने के लिए तमाम जरुरी कारण सता पर बैठे भ्रष्ट लोग पैदा कर रहे हैं।
आज मेरे जैसा आदमी ये सोचने पर मजबूर है कि अंग्रेजो को भागने के लिए क्यों आन्दोलन चलाया गया? उस समय भारत में विकास नहीं हो रहा था? लोगों को जरुरी आवश्कताएं पूरी नहीं हो रही थी? अगर सब हो रहा था तो देशवासी क्यों आंदोलित हुए?
भारतेंदु हरिश्चंद ने लिखा है,अंग्रेजी राज सजे सुख्साज, पर सब धन विदेश चली जात हैं। ये धन विदेश जाना ही अगर गुलामी है तो सवाल उठता है कि आजादी के बाद से अब तक 66000 हजार करोर रुपया swish बैंक के खाते में विदेशो में पड़ा हैं। यह भी गुलामी ही है। इन अंग्रेजों के औलादों से भी तो एक लड़ाई लड़नी पड़ेगी। सवाल यह भी उठता हैं कि हमारी लोकतंत्र में, हमारी कानून में कौन सी खामिया हैं। जो इतनी रुपयों कि लूट हो गई, इतनी बड़ी रकम देश से बहार चला गया और हम देखते ही रह गए?
rajesh ,
जवाब देंहटाएंtumne bilkul thik likha hai main mail par type kar apni tippni alag se karunga, mushkil to yah hai ki itne achhe blog ko koyi neta ya mantri bilkul nahin padhta, kuchh aisa kiya jaye ki aisa sandesh un tak pahunche main talash kar raha hun
ashok