शनिवार, 25 सितंबर 2010

विहार का दुःख

विहार में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो गई. तरह-तरह की पार्टियाँ दिखने लगी हैं. गठबंधन बनाने में नेता व्यस्त हो गए हैं. जदयु और बीजेपी गठजोड़ तो शासन में है ही. विपक्षी दलों में मुख्य राजद लोजपा गठजोड़ मैदान में मजबूती से है.पांच सालों के लिए बिहार का भविष्य तय होना है.
रामविलास पासवान और लालू यादव में मेल समय की मज़बूरी है. नितीश कुमार मुख्य मंत्री न बने इसके लिए यह मेल है. नितीश कुमार मुख्य मंत्री नहीं बने होते अगर इस चुनाव के पहले वाले चुनाव में लालू जी के नेतृत्व में सरकार का गठन हो गया होता. लेकिन राम विलास जी के वजह से दुबारा राज्य में चुनाव हुआ . और नितीश जी मुख्य मंत्री बने.
बिहार में बहुत विकाश हुआ है. ऐसा प्रचारित किया जा रहा है. पर ऐसा बात नहीं हैं तुलनात्मक पिछली सरकार से ज्यादा जरुर हुआ है. चुकि पहले से तस्वीर इतनी ख़राब है कि अभी कुछ भी हुआ, ज्यादा ही लग रहा है. इस चुनाव में बिहार कि जनता के सामने विकाश कोई मुद्दा नहीं है. कानून ब्यवस्था ठीक हुआ है. लेकिन चुनाव में ये वि मुद्दा नहीं है.
मतदान में जात-पात एक आवश्यक बिंदु होता है. इस समीकरण को बनाने में जो सफल होगा सरकार उसी कि बनेगी. जो भी हो सरकार बने.जो भी सरकार बनाये बिहार का विकाश करे. कानून ब्यवस्था ठीक करे, पढ़ाई लिखाई ठीक करे,रोजगार पैदा करे. आजादी के बाद बिहार विकाश में तीसरे नंबर पर था.पर आज अंतिम पर है. इस बात का प्रयास हो कि बिहार एक नंबर पर आ जाये.
बिहारी पुरे देश में अपमानित होते है. बिहारियों को प्रतिस्था मिले इसके लिए पहल हो. हमलोगों को तीसरे चौथे क्लास में पढाया जाता था कि बिहार के पिछड़ेपन के क्या कारण है. जबाब रटवाया जाता था. कि यहाँ के लोग निकम्मे है. कामचोर है. इस तरह कि पढाई बच्चों को न पढाया जाय.

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