लेकिन लूकस टेटे कि हत्या के लिए नक्सलियों को माफ नहीं किया जा सकता हैं. अगर मानवाधिकार कि दुहाई पुलिस अत्याचार के लिए है, तो यह नक्सलियों के लिए भी हैं. ये अलग बात है कि पुलिस वाले इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं. और नक्सली पर कोई कानून लागु नहीं होता. नक्सली अगर अपने को गरीबो के रहनुमा कहते हैं तो उन्हें इस बात कि गारंटी लेनी होगी कि मानवाधिकार का उलंघन नहीं हो.
इस 9 दिनों में अनेक तरह के नौटंकी हुए. इसी नौटंकी कि एक कड़ी थी किसन जी के नाम से हेमंत यादव का प्रकट होना और अभय यादव कि पत्नी से राखी बंधवा कर घोषणा करना कि जाओ तुम्हारे पति को सकुशल रिहा कर दिया गया है. सौभाग्यवती रहो. हेमंत यादव गोविन्द पुर धनबाद का रहने वाला है. १९९५ में बिहार विधान सभा के चुनाव में दानापुर में मुझे मिला था. उस समय लाल्लू यादव के खिलाफ में प्रचार करना चाहता था. १५ अगस्त ९५ को बिहारविधान सभा में नंगे हो कर झंडा फहराने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था. उसने बयाव्स्था के के खिलाफ अपना आक्रोश का इजहार किया था. वह उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति है और उसे व्यवस्था से आक्रोश है. भाषण उसका ओज पूर्ण होता है. वह राम अवधेश सिंह के लिए प्रचार किया था.
बिहार सरकार कि भूमिका अच्छी रही. सर्वदलीय बैठक में रामबिलास और लाल्लू जी का नहीं रहना अच्छा नहीं लगा.
अब पुलिस के सामने एक चुनौती है. कि नक्सलियों कि बढती ताकत को रोके.आखिर जनता का मन नक्सलियों ने कैसे जीता? जनता के सहयोग के बिना इतना बड़ा संगठन चलाना मुश्किल है. पुलिस प्रशासन को भ्रष्टाचार से दूर रहना होगा नहीं तो इसी तरह जान बचाना मुश्किल हो जायेगा. दमन अत्याचार कि निति छोडनी होगी.सरकार को भी भ्रष्ट मुक्त होना होगा
बहुत अच्छा लिखले बाड नक्सली लोग दिन पर दिन तरह तरह के जुल्म जनता एवं पुलिस पर ढा रहल बा अगर उ लोग के ब्यवस्था से विरोध बा त काहे नइखे उ लोग कोई नेता के धर लेता जो रोज पूरा समाज के दोहन कर रहल बा. जनता के पैसा लूट के आपन खजाना भर रहल बा नेता के धरी लोग त अपना साथी के भी छोड़ा लिही और पैसा भी भरपूर मील जाई अच्छा लेख लिखे खातिर बधाई बहुत लोग पसंद करिहन अईसन लेख के.
जवाब देंहटाएंभैया